Tag Archive: sad poem


जानें कहाँ गये वो दिन

जब लिखना ही अभिरुचि था

ज़रूरत भी और कला भी

 

वो वक़्त कुछ और था

जब कलम ही ज़ुबान थी

और कोरा काग़ज़

मेरा अव्याप्त संसार

टूटे बिखरे से जीवन में

तन्हाई को खुद में सिमट जाने से रोकता

वो बंद सा

खुद ही का शिष्टाचार

 

 

अभी खुश हूँ

आज़ाद हूँ

देखता हूँ चारों ओर

और सोचता हूँ

की कितनी बिखरी हुई है

ये व्यवस्थित सी दुनिया

जहाँ खुद को थोड़ा वक़्त दे पाना भी

एक उपलब्धि से कम नहीं और

उपलब्धियों के पीछे भागना ही

दिनचर्या में आम है…

खाली सा हूँ या बहुत भरा

सहमा हुआ हूँ या बहुत डरा

सब कुछ है और सब हैं

फिर भी अकेला सा हूँ मैं

खुद बिन

जाने कहाँ गये वो दिन…

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parted

parted

everyone writes on how a guy feels after two people get parted.

here I try to depict… how a girl really feels…

जाने अन्जाने शायद कुछ

कह ना पायी थी,

तुम भी तो

ना थे समझे,

और हर अनकहा शब्द

दर्द बन कर रह गया है

.

सिरहन सी दौड जाती है

जब पास से निकल जाते हो,
क्या कठोर ही थे

या मैं ना जानी थी,

और हर छिपाया आँसू

वहीं जम कर रह गया है

.

ना चाह कर भी सोचने

पर मज़बूर हुई थी,

कि हम साथ थे जब

तो क्या पैदा इक दूरी हुई थी,

और हम जहाँ हैं आज क्या

उसी का नतीजा हो कर रह गया है

.

दिन से सप्ताह

सप्ताह पक्ष हुए, और

पक्ष महीने हुए हैं

हमें नज़रें मिलाये,

बस दूर से ही

सुनती हूँ तुम्हें,

और यादों के काँच का हर टुकडा

खुद को सताने का ज़रिया हो गया है

.

मैं तुम्हारी तरह

अपनी मर्ज़ी से नहीं चलती,

हज़ारों तरह की उम्मीदों का

नन्हा सा बांध हूँ,

किस किस को थाम के चलूँ

इसी कश्मकश में,

सब कुछ पीछे

छूटता जाता है,

रिश्ते नहीं संभाल पा रही हूँ

बस भाग ही रही हूँ,

तुम्हारा साथ ना दे पायी

इस का दुख ना करना,

मेरा गुस्सा भी

तुम पर नहीं खुद पर है,

कि शायद मैं ही हार गयी तुम्हें

इस जीवन की भाग दौड में

….

.

तुम खुश हो या नहीं

पता नहीं,

पर मैं यहाँ अभी भी

वहीं खडी हूँ,

जहाँ कभी नहीं

जाना चाहती थी,

मैं चुप सी ही ठीक हूँ

शायद हाँ, तुम्हारे कोप के इंतज़ार में,

और ये बेकार सा जीवन ही

मेरे जीने की वज़ह सा हो गया है….

रात की दस्तक दरवाज़े पर है
आज का दिन भी बीत गया है
कितना था उजाला फिर भी फिर से
अन्धियारा ही जीत गया है
एकान्त की चादर ओढ़ कर फिर से
मैं खुद में खोया जाता हूँ
आँखों के सामने यादों के रथ पर
मेरा ही अतीत गया है
सन्नाटों के गुन्जन में दबकर
अपनी ही आवाज़ नहीं आती मुझको
आँखों की सरहद पर लड़ता
आँसू भी अब जीत गया है
टूटे दर्पण के सामने बैठकर
मैं स्वयं को खोज रहा हूँ
प्यार है, जीना मुझे भी है,
पर अब इंतजार करता करता ये दिल थक गया है,
वो समझें मुझे, बिना कहे ये बोल,
इस उम्मीद में ये लम्हे काट रहा हूँ
बस उन्हें ना कहते कहते
ये मन भी थक गया है,
………
चुप हूँ, खामोश हूँ, बेज़ुबान हूँ
अलग से बैठा हूँ एक झूठी हँसी के साथ, और
यूँ ही बैठे बैठे जाने
कितना अरसा बीत गया है … ॥

To know just how he suffered would be dear;

To know if any human eyes were near

To whom he could he could entrust his wavering gaze,

Until it settled firm on paradise.

To know if he was patient, part content,

Was dying as he thought, or different;

Was it a pleasant day to die,

And did the sunshine face his way?

What was his furthest mind, of home, or god,

Or what the distant say,

At news that he ceased human nature

On such a day?

And wishes, had he any?

Just his sigh, accented,

Had been legible to me.

And was he confident until

Ill fluttered out in everlasting well?

And if he spoke, what name was best,

What first,

What one broke off with

At the drowsiest?

Was he afraid, or tranquil?

Might he know

How conscious consciousness could grow,

Till love that was, and love too blest to be,

Meet- and the junction to be eternity?

Where is he gone……..

Where is that guy lost???

VZVPA85SUDZX


This rainy night where is she?

Is she in some town

Racing along a dark street,

As the rain comes thundering down…

Does she go home to a lover,

Does she go home alone,

Does another man share the love

That I could never had known?

Or is she home happily

In her town I don’t know where,

Or maybe she’s from the country,

Or from the mountains air…

As I think I know I don’t know her,

Although I once thought I did,

I wonder if she knew I loved her,

If she cared why my love so I hid?

Maybe she’s in the arms of another,

Some lucky man darling she does call,

I wonder if ever I met her,

Would she even know me at all?

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