Tag Archive: niyati


बीते पलों में खोया जा रहा हूँ,
सूखे आँसूओं में डूबा जा रहा हूँ,
दिल ही दिल कोसता हूँ किसी को
धुंधली रातों में सोया जा रहा हूँ।
ना ना… डरो मत…
किसी देवदास से नहीं मिले तुम,
हैँ और भी लोग दुखी यहाँ
मैं तो बस एक छोटी सी
चुभन से उठे दर्दों के
एकाकीकृत बीज को
अपने से दूर कहीं
बोया जा रहा हूँ।

ठीक वैसी ही रात है,
वैसा ही अंधियारा…
फ़र्क सिर्फ़ इतना कि
इस बार सुबह का इन्त्ज़ार है
और आँखों मे उन्हीं
टूटे दर्पण के टुकडों की चमक,
शायद एक उम्मीद है
कि नयी सुबह का पंछी
एक नया पैगाम लायेगा।

फिर से…
चुप हूँ, खामोश हूँ, बेज़ुबान हूँ
पर मेरा विश्वास
मेरे ही अविश्वास से
जीत गया है,
और अपनी नियति को
ठुकराते ठुकराते जाने…
कितना अरसा बीत गया है… ॥

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रात की दस्तक दरवाज़े पर है
आज का दिन भी बीत गया है
कितना था उजाला फिर भी फिर से
अन्धियारा ही जीत गया है
एकान्त की चादर ओढ़ कर फिर से
मैं खुद में खोया जाता हूँ
आँखों के सामने यादों के रथ पर
मेरा ही अतीत गया है
सन्नाटों के गुन्जन में दबकर
अपनी ही आवाज़ नहीं आती मुझको
आँखों की सरहद पर लड़ता
आँसू भी अब जीत गया है
टूटे दर्पण के सामने बैठकर
मैं स्वयं को खोज रहा हूँ
प्यार है, जीना मुझे भी है,
पर अब इंतजार करता करता ये दिल थक गया है,
वो समझें मुझे, बिना कहे ये बोल,
इस उम्मीद में ये लम्हे काट रहा हूँ
बस उन्हें ना कहते कहते
ये मन भी थक गया है,
………
चुप हूँ, खामोश हूँ, बेज़ुबान हूँ
अलग से बैठा हूँ एक झूठी हँसी के साथ, और
यूँ ही बैठे बैठे जाने
कितना अरसा बीत गया है … ॥

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