Tag Archive: miss you


खुले आकाश में मिले और

उलझ कर रह गये,

उडाने वाले माँझे को कब

खुद चलाने लगे

पता ना लगा,

we

हम तुम...

बेरंग से कब आसमानी रंगों में रंगी

पतंगों में ढल गये

हम तुम…..

समय की बयार उडाती गई

और बहते गये,

और साथ उडते उडते

कब इस जग से और दूर

और ऊपर हो गये

पता ना लगा,

दो दिशाहीन अंजानों से

कब अपने से बन गये

हम तुम…

पर पतंगें ही तो थे,

कभी ना कभी

कटने बिछडने के लिये

ही तो उडे थे…

हवा ने रुख क्या बदला

धुंधले बादलों से नीचे आ गये,

उलझी डोर सुलझी,

और सुलझे हुए रिश्ते

कब उस बेज़ान सी डोर की तरह उलझ गये

पता ना लगा,

अनजान से अपने बने थे

अपनों से फ़िर अनजान बने…

इस मतलबी दुनिया को

बचाते समझाते कब

अनजान भी ना रहे

हम तुम…..

WAS ALWAYS DEDICATED TO YOU SWEETU… 🙂

 

A walk

hand in hand

:)

🙂

a sleep that

rests on shoulder

a sweetness that we share

a frown that you care

our voices so still

that heartbeats come to living…

no matter how and where and why I am,

will not stop loving…

 

Happiness is cherished with you,

you know about my tears too,

days sometimes are black

I hopefully can hold myself back,

I just count my days dear,

hours with you will be many more

o please..!!

hold me, hug me so near to you

so that every breath,

every thought

starts thanking you,

for I promise that a bigger promise

is waiting,

will not….

 

A whisper I hear,

a call so dear,

an hour much awaited

when another year adds to you again,

may the smile remains the same,

and happiness lifelong blooms,

and may everything you touch

always experiences unfading spring

will not ever…

 

WILL NOT STOP LOVING… 🙂 🙂

parted

parted

everyone writes on how a guy feels after two people get parted.

here I try to depict… how a girl really feels…

जाने अन्जाने शायद कुछ

कह ना पायी थी,

तुम भी तो

ना थे समझे,

और हर अनकहा शब्द

दर्द बन कर रह गया है

.

सिरहन सी दौड जाती है

जब पास से निकल जाते हो,
क्या कठोर ही थे

या मैं ना जानी थी,

और हर छिपाया आँसू

वहीं जम कर रह गया है

.

ना चाह कर भी सोचने

पर मज़बूर हुई थी,

कि हम साथ थे जब

तो क्या पैदा इक दूरी हुई थी,

और हम जहाँ हैं आज क्या

उसी का नतीजा हो कर रह गया है

.

दिन से सप्ताह

सप्ताह पक्ष हुए, और

पक्ष महीने हुए हैं

हमें नज़रें मिलाये,

बस दूर से ही

सुनती हूँ तुम्हें,

और यादों के काँच का हर टुकडा

खुद को सताने का ज़रिया हो गया है

.

मैं तुम्हारी तरह

अपनी मर्ज़ी से नहीं चलती,

हज़ारों तरह की उम्मीदों का

नन्हा सा बांध हूँ,

किस किस को थाम के चलूँ

इसी कश्मकश में,

सब कुछ पीछे

छूटता जाता है,

रिश्ते नहीं संभाल पा रही हूँ

बस भाग ही रही हूँ,

तुम्हारा साथ ना दे पायी

इस का दुख ना करना,

मेरा गुस्सा भी

तुम पर नहीं खुद पर है,

कि शायद मैं ही हार गयी तुम्हें

इस जीवन की भाग दौड में

….

.

तुम खुश हो या नहीं

पता नहीं,

पर मैं यहाँ अभी भी

वहीं खडी हूँ,

जहाँ कभी नहीं

जाना चाहती थी,

मैं चुप सी ही ठीक हूँ

शायद हाँ, तुम्हारे कोप के इंतज़ार में,

और ये बेकार सा जीवन ही

मेरे जीने की वज़ह सा हो गया है….

तुम्हारी मुस्कुराहटों के,
तुम्हारी प्यारी बातों के,
उन साथ बिताये पलों के
रूप में मिली सौगातों के
बदले में,
काश तुम्हें कुछ दे पाता,
काश, एक कविता लिख पाता…।

यूँ तो जो महसूस किया
उसे कोरे कागज़ पर उकेरना
बहती नदी को मुठ्ठी में
बन्द करने जैसा होगा,
काश उन भावनाओं के नीर
का रंग तुम्हें दिखला पाता,
काश, एक कविता लिख पाता…।
कोई ना समझ पाया था
ना कभी समझेगा,
कैसे और क्या हैं हम
इक-दूजे के लिये,
काश उस अनकही अनजानी
समझ को कोई संज्ञा दे पाता,
काश, एक कविता लिख पाता…।
अरे पगली,
कोई कवि थोडे ही हूँ,
कि तुझ पर अनगिनत
काव्य न्यौछावर कर दूंगा,
पर तेरी हर मुस्कुराहट
तो मेरे लिये ’तुकान्त’ है,
काश उन पलों, रंगों, संज्ञाओं पर
मैं भी एक ’मधुशाला’ लिख पाता…
काश, एक कविता लिख पाता…।

बीते पलों में खोया जा रहा हूँ,
सूखे आँसूओं में डूबा जा रहा हूँ,
दिल ही दिल कोसता हूँ किसी को
धुंधली रातों में सोया जा रहा हूँ।
ना ना… डरो मत…
किसी देवदास से नहीं मिले तुम,
हैँ और भी लोग दुखी यहाँ
मैं तो बस एक छोटी सी
चुभन से उठे दर्दों के
एकाकीकृत बीज को
अपने से दूर कहीं
बोया जा रहा हूँ।

ठीक वैसी ही रात है,
वैसा ही अंधियारा…
फ़र्क सिर्फ़ इतना कि
इस बार सुबह का इन्त्ज़ार है
और आँखों मे उन्हीं
टूटे दर्पण के टुकडों की चमक,
शायद एक उम्मीद है
कि नयी सुबह का पंछी
एक नया पैगाम लायेगा।

फिर से…
चुप हूँ, खामोश हूँ, बेज़ुबान हूँ
पर मेरा विश्वास
मेरे ही अविश्वास से
जीत गया है,
और अपनी नियति को
ठुकराते ठुकराते जाने…
कितना अरसा बीत गया है… ॥

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